शुक्रवार, 12 जून 2009
हमारा ग़लत स्वभाव
जो कमजोरी सिर्फ़ हम ही ख़त्म कर सकते है, हमारे अलावा और कोई नही कर सकता है, उसे हम गुरु या भागवान से ख़त्म करवाने की कोशिश करतें हैं। जैसे हमारे अन्दर मन के रोग हमने स्वयं पैदा कियें हैं और उसे गुरु से ख़त्म करवातें हैं। आधुनिक गुरु घंटाल भी ऐसे है कि शिष्य को ........इसी के साथ साथ एक और विडम्बना है हमारे इस देश में कि जो प्रकृति व भगवान् के अधिकार में है उसे हम स्वयं अधिकार करने की कोशिश करतें हैं। जैसे - यह शरीर प्रतिपल मर रही है पर इसे अनंत काल तक जिन्दा रखने के लिए कितना कोशिश करतें हैं। जब तक हम इसे नही समझेगें तब तक हमारी समस्या का समाधान संभव नही है।
गुरुवार, 11 जून 2009
योगी बहता है !
बुधवार, 10 जून 2009
HOW TO SIT BEHIND FIVE SENSES;

Now I started practice to know this separateness. Finally I got the ultimate way “how to sit behind our self palace”. This was the only way for achieving me. Earlier I was doing everything, but got nothing, now doing nothing and got everything. Everything doesn’t mean the outer worlds, but the level of inner satisfaction which I had achieved.
Chaitanya Meditation; let sit straight in any meditative pose with close eyes. Place should be dark where-ever you sit. Don’t try! Let see your closed eyes, as a great observer of this sense. As you start to observe around eyes, eye brow, inner part of eye, you will start feeling relax. Because you are making separate to yourself from one of the great sense, eyes. Like this let practice with other four senses.
शनिवार, 6 जून 2009
क्या भगवान् ही सब कुछ करता है?

"सब कुछ भगवन कर रहा है, मै कुछ नही करती, बिना उसके एक पत्ता तक नही हिल सकता है।"
मैंने पूंछा की भगवान के बारे में जो आप प्रवचन कर रहीं हैं, क्या यह भगवान् ही करा रहा है।
"बिल्कुल वही करा रहा है "
क्या जो लोग किसी को गाली देतें हैं, यह भगवान ही कराता।
"नही यह भगवान् नही बल्कि उसकी अज्ञानता है, जो उससे ग़लत कार्य कराती है"
तो क्या ग़लत कार्य व अज्ञानता भगवान् के अधिकार में नही होता।
"नही यह ग़लत कार्य तो उसके पूर्व जन्म का दुष्कर्म होता है"
हे माता जब भगवान् ही सब कुछ कराता है तो पूर्व जन्म में जो उस व्यक्ति ने दुष्कर्म किया तो उसका रिशपोंसिबल भला कौन? क्या अज्ञानता भगवान् के अधिकार में नही होता है ?
सत्य तो यह है कि हम अपने हर एक कार्य को भगवान् पर छोड़ देतें हैं।यद्यपि छोड़ दें तो समस्या का समाधान हो जाय, पर केवल बोलते हैं कि भगवान् सब कुछ कर रहा है, उस पर अमल नही करते हैं स्वयं पर रिस्पोंस्बिलिती कभी लेते ही नही ।
इस सिद्धांत से स्वयं के अन्दर परिवर्तन कभी भी नही हो सकता है । भगवान् आधार है हमारी एकाग्रता का। वो हमारे अन्दर मन की शक्ति को बढाता है । उसका उपयोग हम कैसें करे ये तो हमें ही सीखना पड़ेगा ।
मैंने पूंछा की भगवान के बारे में जो आप प्रवचन कर रहीं हैं, क्या यह भगवान् ही करा रहा है।
"बिल्कुल वही करा रहा है "
क्या जो लोग किसी को गाली देतें हैं, यह भगवान ही कराता।
"नही यह भगवान् नही बल्कि उसकी अज्ञानता है, जो उससे ग़लत कार्य कराती है"
तो क्या ग़लत कार्य व अज्ञानता भगवान् के अधिकार में नही होता।
"नही यह ग़लत कार्य तो उसके पूर्व जन्म का दुष्कर्म होता है"
हे माता जब भगवान् ही सब कुछ कराता है तो पूर्व जन्म में जो उस व्यक्ति ने दुष्कर्म किया तो उसका रिशपोंसिबल भला कौन? क्या अज्ञानता भगवान् के अधिकार में नही होता है ?
सत्य तो यह है कि हम अपने हर एक कार्य को भगवान् पर छोड़ देतें हैं।यद्यपि छोड़ दें तो समस्या का समाधान हो जाय, पर केवल बोलते हैं कि भगवान् सब कुछ कर रहा है, उस पर अमल नही करते हैं स्वयं पर रिस्पोंस्बिलिती कभी लेते ही नही ।
इस सिद्धांत से स्वयं के अन्दर परिवर्तन कभी भी नही हो सकता है । भगवान् आधार है हमारी एकाग्रता का। वो हमारे अन्दर मन की शक्ति को बढाता है । उसका उपयोग हम कैसें करे ये तो हमें ही सीखना पड़ेगा ।
बुधवार, 3 जून 2009
my diary 3-3-1998
जब भी हमे कभी इस बात का ज्ञान हो जायकि अमुक नाम की परम्परा वर्तमान समाज के हित में नही तो हमें उसको बदलने का प्रयास अवस्य करना चाहिए । बुद्धि का सम्पूर्ण कर्तव्य है की अपने से जुड़े समस्त अंगों का निरीछन करे और उसे एक ऐसी गति प्रदान करे जो स्थिर एवं पारंपरिक हो क्योंकि यदि ऐसा न हुआ तो समाज में संगठन की छमता का छीन होना प्रारम्भ हो जाएगा। अंततः यही होगा की अज्ञानता ही राज्य करेगी । जाती , वर्ग तथा राज्य में विभाजन एक आम बात हो जायेगी ।
हम कुछ ऐसा करें कि इसमे परिवर्तन हो सके ।
वह सबसे बड़ी कमजोरी क्या है जो इस महान रास्ट्र को दीमक कि भांति चाटे जा रही है । मुझे तीन बातों की कमी प्रमुख रूप से दिखाई देती है; अज्ञानता , लक्ष्यविहीनता , और आलस्य की कमी। इन तीनो में कौन पहले और कौन बाद में है , यह कहना मुश्किल है पर अज्ञानता को ही हमें प्रमुखता पर रखना होगा। क्योंकि ज्ञान के आने पर दिशा का निर्धारण स्वतः हो जाता है । दिशा के निर्धारण होने पर जीवन में एक गति आ जाती है । हम सभी भासनबाजी करने में माहिर हैं कर्म में नही । जो कर्म में माहिर हैं उन देशों को देखो, वे कंहा पर हैं ।
हम कुछ ऐसा करें कि इसमे परिवर्तन हो सके ।
वह सबसे बड़ी कमजोरी क्या है जो इस महान रास्ट्र को दीमक कि भांति चाटे जा रही है । मुझे तीन बातों की कमी प्रमुख रूप से दिखाई देती है; अज्ञानता , लक्ष्यविहीनता , और आलस्य की कमी। इन तीनो में कौन पहले और कौन बाद में है , यह कहना मुश्किल है पर अज्ञानता को ही हमें प्रमुखता पर रखना होगा। क्योंकि ज्ञान के आने पर दिशा का निर्धारण स्वतः हो जाता है । दिशा के निर्धारण होने पर जीवन में एक गति आ जाती है । हम सभी भासनबाजी करने में माहिर हैं कर्म में नही । जो कर्म में माहिर हैं उन देशों को देखो, वे कंहा पर हैं ।
सोमवार, 1 जून 2009
Black vs. White
This poem was nominated for best poem of 2005 written by an African child:
When i was born, i black
when i grow up, i black
when i go in sun, i black
when i scared, i black

when i sick, i black
& when i die, i still black
& you white fella..
when you born, you pink
when you grow up, you white
when you go in sun, you red,
when you cold, you blue
when you scared, you yellow
when you sick, you green
& when you die, you gray
& you calling me colored??
Comment please…………………………
__._,_.___
रविवार, 31 मई 2009
THE ENERGY OF BELIEF
A recent study compared the performance of three groups on a creative task. One group was given alcohol. Another group was given tonic water. A third group was led to believe they had been given alcohol - but had not. Apparently, the best performing group consisted of those who wrongly believed they had been given alcohol. Perhaps this led to less inhibited thinking without the actual negative effects of real alcohol. In the same way it is possible to speculate that belief and confidence in one's own creative skill may actually increase that skill.
The base of confidence is belief: the confidence comes only after having belief. It’s your nature..............................
The base of confidence is belief: the confidence comes only after having belief. It’s your nature..............................
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