Wednesday, August 14, 2013

Start meditation

ध्यान का प्रारंभ विश्वाश से मत करो क्योंकि जंहा विश्वाश है वंहा अविश्वाश के पैदा होने की पूरी संभावना होती है. , इसलिए ध्यान का प्रारंभ विश्वाश और अविश्वास, दोनों के परे से ही करना चाहिए. 
अर्थात ध्यान का प्रारंभ सिर्फ और सिर्फ स्वयं से ही करना चाहिए. 
क्योंकि स्वयं का अस्तित्व शंकारहित है  , यदि इस पर शंका करते भी हो तो भी आपका अस्तित्व स्वयं सिद्ध है.....
Yogi anoop 
Yoga guru from Delhi